मन में उठने वाली भावनाओं के ज्वार का वेग जब प्रबल होता है . इन भावनाओं से उत्पन्न मन की अनुभूतियों कलमबद्ध करने की एक कोशिश ...
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उन्मुक्त उसका प्रेम
मुक होकर भी उन्मुक्त उसका प्रेम है अपलक निहारते ही खुशियों की तरंग स्पंदित कर जाती है, निस्वार्थपुर्ण उसका सारा जीवन इस धरा पर तू ही तो ...
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मेरे राम भोर की पहली किरण हो तुम सुबह की शुरुआत राम-राम से हृदय की असीम गहराइयों में तुम ही तो बसे हो मेरे राम प्रेम तुम ही ह...
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वृक्ष है श्रृंगार वसुधा का धरा पर जीवन का तुम केंद्र बिंदु चुपचाप खड़ा तपस्या में लीन तपस्वी की तरह खुद के लिए कभी जिया नहीं जी...
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मैं भरी दुपहरी का तपिश, तुम हो बारिश की बूँद प्रिये ll मैं हूँ खार जल सा खारा, तुम हो अमृत का कलश प्रिये ll मैं हूँ राह में पड़ा पत्थर , त...

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