मन में उठने वाली भावनाओं के ज्वार का वेग जब प्रबल होता है . इन भावनाओं से उत्पन्न मन की अनुभूतियों कलमबद्ध करने की एक कोशिश ...
भक्ति रस (कविता) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भक्ति रस (कविता) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
उन्मुक्त उसका प्रेम
मुक होकर भी उन्मुक्त उसका प्रेम है अपलक निहारते ही खुशियों की तरंग स्पंदित कर जाती है, निस्वार्थपुर्ण उसका सारा जीवन इस धरा पर तू ही तो ...
-
मुक होकर भी उन्मुक्त उसका प्रेम है अपलक निहारते ही खुशियों की तरंग स्पंदित कर जाती है, निस्वार्थपुर्ण उसका सारा जीवन इस धरा पर तू ही तो ...
-
काले काले बादलों की अठखेलियां ठंडी पुरवा हवा के झोंके खुशगवार मौसम का मिजाज बारिश की बूंदों का बरसना प्यासी मिट्टी से आती सौंध...
-
कैलाशपति तुम ही हो केदारनाथ तुम उमापति तुम ही हो भोलेनाथ तुम नीलकंठ तुम ही हो महादेव तुम भूतनाथ तुम ही हो मृत्युंजय तुम ...
